Tuesday, 13 August 2013

लाल किला के प्राचीर से

अब तो संगीनों के साये मे,
गर्व से तिरंगा फहराये जाते ।
लाल किले की प्राचीर से,
लगभग वही बात दुहराये जाते ॥

आर्थिक, सामाजिक व शिक्षा के लिये,
हमारी सरकार कटिबद्ध है ।
बेरोजगारों को भी होंगे रोजगार,
इसके लिये हम बचन बद्ध हैं ॥

महिलावों व किसानों के,
हितों की बात की जाती है ।
बूढ़े,बच्चों व बिकलांगो की भी,
बहुत सुध ली जाती है ॥

नक्सलवाद व आतंकवाद भी,
विकास मे एक बड़ी बाधा है ॥
उन सबके लिये हम प्रयासरत  हैं,
ये आपसे हमारा वादा है ॥

मित्रों:, पड़ोसियों से भी अच्छे संबन्ध हों,
भारत सदा यही चाहता है ।
पर वे अपनी मर्यादा लांघ रहे,
जो हम सबको नही सुहाता है ॥

अभी कुछ दिन पहले उत्तराखण्ड की त्रासदी,
जिसमें कई निर्दोषों की जानें गई ।
ऐसे हादशों मे हम एक हैं रहते,
ये दुनिया भी है जान गई ॥

सेना का मनोबल बढ़ा रहे,
और राज्यों के बटवारे की भी बातें होंगी ।
विग्यान,मंहगाई व भ्रष्टाचार,
और साम्प्रदायिकता की भी यादें होंगी ॥

ऐसे ही लुभावने भाषण से,
जनता का मनोबल बढाया जाता ।
अपने सरकार की बड़ाई कर,
गर्व से तिरंगा फहराया जाता ॥
अपने सरकार की बड़ाई कर,
गर्व से तिरंगा फहराया जाता.......

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
13-08-2013,12:15pm,tuesday,(720)
pune,maharashtra


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