Thursday, 21 November 2013

``"भ्रष्टाचार से आहत हो गया है भारत आज"

भ्रष्टाचार से आहत, हो गया है, भारत आज,
हर एक जगह मे, दिखता भ्रष्टाचार है !
लगभग हर विभाग मे , हो गया है, चलन आज ,
बिना पैसे दिये ,सुनी जाती , पुकार है !!

किसी अच्छे स्कूल मे, दाखिला, दिलाना है तो,
ज़ेब मे हो मोटी रकम ,तभी ,आगे बढ़िए !
न्यायालय मे मुकदमे की तारीख बढानी है तो,
बाबू जी के टेबल पर, कुछ, पैसे धरिए !!
हर जगह रिश्वत व् बेईमानी का जमाना है |
रिश्वत नही दोगे तो मिलता तिरष्कार है ....
लगभग हर विभाग मे , हो गया है, चलन आज ,
बिना पैसे दिये ,सुनी जाती , पुकार है !!



यदि ज़ल्दी दर्शन पाना है ,मन्दिर मे, भगवान का ,
तो पुजारी को, मुंह-मांगा, पैसे देना पड़ता है !
थाने मे रपट ,लिखाना है, यदि आपको,
उसके लिए भी ,वहां पैसे, देना पड़ता है !!
सदाचारियों का तो जीना हराम हुआ ,
पर भ्रष्टाचारियों को खूब मिलता पुरष्कार है ....

लगभग हर विभाग मे , हो गया है, चलन आज ,
बिना पैसे दिये ,सुनी जाती , पुकार है !!



निर्माण- मेन्टेनेन्स का, कोई  ठेका, चाहिए तो,
उसमे भी ,प्रतिशत का, ख्याल रखा जाता है !
गाड़ियों की पासिंग , या आर.टी . मे काम हो,
वहां भी तो पैसों का, सवाल, रखा जाता है !!
घुस नही दोगे तो दौड़ाते बार बार वे ,
आन लाइन -ऑफ़ लाइन बस ये प्रचार है .....

लगभग हर विभाग मे , हो गया है, चलन आज ,
बिना पैसे दिये ,सुनी जाती , पुकार है !!



सरकारी अस्पतालों का, हो गया है ,बुरा हाल,
वहां भी तो लाशों का, सौदा, किया जाता है !
नौकरी चाहिए ,यदि किसी भी, विभाग मे,
योग्यता के साथ-साथ, पैसे, लिया जाता है !!
अब तो सरकारी जैसे ही प्राइवेट में भी हो गया ये रोग ,
बिना सुबिधा शुल्क वालों के लिए ही कतार है ....

लगभग हर विभाग मे , हो गया है, चलन आज ,
बिना पैसे दिये ,सुनी जाती , पुकार है !!



बिज़ली-टेलीफ़ोन का, कनेक्शन, चाहिए तो,
साहब जी को, पैसे से, कनेक्ट  पहले किजीए !
ट्रेनो मे आरक्षण ,चाहिए यदि, आप को ,
टी.टी साहब की जेब, गरम ,पहले किजीए !!
भ्रष्टाचार पर नकेल कसती है सरकार पर ,
आम आदमी इन सबसे लाचार है ...

लगभग हर विभाग मे , हो गया है, चलन आज ,
बिना पैसे दिये ,सुनी जाती , पुकार है !!



ये चन्द तश्वीर, है ये, भ्रष्टाचार का,
पैसे नही दोगे, तो काम, हो पाएगा !
किसी भी सरकारी, काम को ,करवाना है तो,
पैसे जब दोगे, तो सारा काम, बन जाएगा !!
रिश्वत लेना -देना ये दंडनीय अपराध है ,
पर भ्रष्टाचारियों का तो यही संस्कार है ....


भ्रष्टाचार से आहत, हो गया है, भारत आज,
हर एक जगह मे, दिखता, भ्रष्टाचार है !
लगभग हर विभाग मे, हो गया है, चलन आज,
बिना पैसे दिये, सुनी जाती, पुकार है !!

 मोहन श्रीवास्तव (कवि)
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 १६//१९९४ समय- .यम,
वृहस्पतिवार चिन्चभुवन,वर्धा रोड, नागपुर





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