Saturday, 23 November 2013

सब जगह ही महिलाओं का शोषण किया जाता

कर रहे तरक्की हम इक्कीसवीं सदी में,
और आगे दर आगे बढ़ रहे हैं
पर महिलाओं बच्चों का,
हम तरह से शोषण कर कर रहे हैं

महिलाओं को पुरुषों के समान,
अधिकार दिलाने की बातें होती हैं
पर आज ये शोषित महलाएं,
खुन के आंसू रोती हैं

सरकारी या हो निजी महकमा,
सब जगह ही महिलाओं का शोषण किया जाता
शारीरिक मानषिक यातनावों से,
इन्हें अपमानित किया जाता

जिनके अधीन ये रहती हैं,
वे उन पर भरपूर जुल्म ढहाते हैं
वे सब मजबुरी मे सहती रहती,
और ये मन ही मन मुस्काते हैं

लेकिन तुम अबला या कमजोर नहीं,
तुम तो इक चिंगारी हो
अन्याय कभी नहीं सहना,
तुम महान भारत की नारी हो

पर आज के इस बदलते परिवेश मे भी,
कई जगह महिलाएं सम्मान से जिती हैं
और वे सब भी सम्मान किया करते,
जिनके अधीन ये रहती हैं

कर रहे तरक्की हम इक्कीसवीं सदी में,
और आगे दर आगे बढ़ रहे हैं
पर महिलाओं बच्चों का,
हम तरह से शोषण कर कर रहे हैं
पर महिलाओं बच्चों का,
हम तरह से शोषण कर कर रहे हैं......

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
22-11-2013,Friday,04:30PM,(803),
Pune,Maharashtra.





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