Saturday, 9 November 2013

हम अच्छे तो जग अच्छा

हम अच्छे तो जग अच्छा,
यह झूठ नहीं सच्चाई है
ईर्ष्या,जलन तो ठीक नही,
ये तो मन की कुटिलाई है

ना हो हममें द्वेष,भावना,
ना ही हम करें किसी की बुराई ही
ना हो कभी अभिमान हमें,
ना दिल में हो चतुराई भी

यदि कोई आगे बढ़ रहा है तो,
उसको और सहयोग करें
वह कैसे हो रहा है सफल,
वैसा ही हम भी प्रयोग करें

कभी किसी को बुरा कहने के पहले,
हमें अपने पर भी विचार करना होगा
नफरत से नहीं जीते जाते हैं दिल,
हमें प्यार तो पहले करना ही होगा

हमें सम्मान यदि पाना है सबसे,
तो पहले सम्मान हमे देना होगा
सबसे बड़ा है धन विनम्रता,
और कुछ पाने के लिये तो खोना ही होगा

हम अच्छे तो जग अच्छा,
यह झूठ नहीं सच्चाई है
ईर्ष्या,जलन तो ठीक नही,
ये तो मन की कुटिलाई है
ईर्ष्या,जलन तो ठीक नही,
ये तो मन की कुटिलाई है.....

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
09-11-2013,Saturday,11:30am,(793),

Pune,Maharashtra.

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