Saturday, 16 November 2013

गजल (आज पूनम की रात है साथिया)

आज पूनम की रात है साथिया,
आप बाहों में मुझको समा लिजीए।
चाँद को देखकर मैं तो बेचैन हूं,
चाँदनी चाँद में तो बसा लिजीए
आज पूनम की रात......

कर रहे आशिकी तारे तो आज हैं,
इनकी नजरों से हमको बचा लिजीए
उठ रहा दर्द दिल मे मेरे आज है,
दर्द दी है तो इसकी दवा दिजीए
आज पूनम की रात......

सर्द सी लग रही है मेरे पिया,
गर्म आगोश में तो छिपा लिजीए
होठ तो प्यास से सुखते जा रहे,
प्यास होठों से अपने बुझा दिजीए
आज पूनम की रात......

सेज फूलों की हमनें सजाई हुई,
अश्क खुशियों का आखों में है रहा
नाक की नथिया तो बन गया है गजल,
हाथ की चूडीयां मन को है भा रहा
आज पूनम की रात......

रात ठंडी-गुलाबी और मदहोश सी,
आज हमको नशा ही नशा छा रहा
कानों के मेरे झुमके कहीं पे गिरे,
पायल पावों का बजता चला जा  रहा
आज पूनम की रात......

कर दिया अर्पण हर चीज मैं आपको,
अब ना अपने से हमको जुदा किजीए
हूं कली आपकी डाल की हम सफर,
इसकी खुशबू में पल-पल नहा लिजीए
आज पूनम की रात......

आज पूनम की रात है साथिया,
आप बाहों में मुझको समा लिजीए।
चाँद को देखकर मैं तो बेचैन हूं,
चाँदनी चाँद में तो बसा लिजीए
आज पूनम की रात......

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
17-11-2013,Sunday,06:00AM,(797),
Pune,Maharashtra.
चित्र ; गूगल से सादर लिया गया। 





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