Sunday, 8 December 2013

दुनिया दिवानी नंबर के पीछे





कहीं सुख-चैन नही, आराम नही,
धरती पर या अम्बर मे हो !
सब की बस एक ही चाहत,
सबसे अच्छे मेरे नंबर हो !!

विद्दार्थी चाहे अव्वल नंबर,
तो पत्नी चाहें सब नंबर वन !
प्यार मे भी देखा जाता नंबर,
तो शराबी भी चाहे नंबर वन !!

वोटों मे भी नंबर के आंकड़े,
तो सत्ता सुख भी नंबर वालों को है !
ईनाम- पुरष्कार के तोहफ़े मिलते,
बस नंबर वन के चमचों को है !!

ईमानदारी की कमाई है नंबर वन,
तो बेइमानी की कमाई नंबर दो !
चार सौ बीश ज़ालसाजी का नंबर,
जो ठगते हैं लोगों को !!

रिश्तों मे भी देखा जाता नंबर,
तो फ़िल्मों मे भी नंबर वनं !
लाटरी मे देखा जाता नंबर,
कोई कंगाल बने तो कोई पाए धन !!

आर.टी. मे भी नंबर वन के आंकड़े,
तो आखों के चश्में में भी नंबर है
ट्रेन,बस सिनेमा मे भी,
वहां सीट के मिलते नंबर हैं

मोबाइल मे भी देखा जाता नंबर,
तो चमचो मे भी नंबर वन
माशुका भी चाहें सब नंबर वन,
तो पति भी चाहे सब नंबर वन

दुनिया दिवानी नंबर के पीछे,
जहा देखो वहा नंबर ही नंबर !
नंबर के गणित मे सभी उलझे,
चाहे रजनीति या हो दफ़्तर !!

मोहन श्रीवास्तव  (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-०४/११/२००१,रबिवार,रात- १०.१५ बजे,

नामक्कल , (तमिलनाडु)
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