Friday, 6 December 2013

जब वक्त बुरा हो जाता है

जब वक्त बुरा हो जाता है,
तो अपने भी पराये हो जाते
विधि भी विपरीत हैं हो जाते,
दुश्मन भी सवाये हो जाते

जिनसे मिलता था कभी प्यार हमें,
उनके दिल मे नफरत भर जाता
कर रहे हों भलाई हम उनका,
पर उन्हें बुराई ही समझ आता

कई तरह से आती है विपदा,
जो घुट-घुट कर सहते रहते
अपमान बहुत सहना पड़ता,
जो हम सोच भी नहीं सकते

सोच-समझ के जितना भी चलें,
पर हर जगह ठोकर है मिला करता
हर पल होते हैं अपशकुन,
और दिल तो हमेशा जला करता

ईश्वर का ध्यान सदा हो दिल मे,
और उनमें ही विश्वाश हो
सदा सत्य पर चलते रहे, तब ,
बुरा वक्त भी हमारा दास हो

पर जीत सदा मिलती है उन्हें,
जिनको सहने की आदत हो
बुरा वक्त भी गुजर जाता,
बस मुश्किलों से लड़ने की चाहत हो

जब वक्त बुरा हो जाता है,
तो अपने भी पराये हो जाते
भगवान भी साथ नहीं देते,
दुश्मन भी सवाये हो जाते

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
06-12-2013,Friday,12:30PM,(811),
Pune,M.H.


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