Tuesday, 3 December 2013

असली घी के दिये जलाते होंगे


कई उम्मीदवारों के अब,
किस्मत के दरवाजे बन्द हुये हैं
सभी के दिल धक-धक करते,,
और कल्पना के सागर मे मस्त हुए हैं

अब जीत हमारी ही होगी,
यह सब के दिल मे आशा होगा
गुप-चुप अपने आराध्य देव से ,
विजयी होने का मनौती माना जाता होगा

हर रोज सुगन्धित अगर बत्ती की और,
असली घी के दिये जलाते होंगे
दिन रात जीत की माला जपते और,
अपने ईश्वर-अल्लाह से मनाते होंगे

अब सब्र का बांध तो टुटने लगा,
और परीक्षा फल निकट रहा है
चेहरों पर हवाइयां उड़ने लगी,
पर मन मे जीत तो रहा है

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
15-09-1999,wednsday,midnight1.05 am,
chandrapur,maharashtra.





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