Monday, 2 December 2013

मेरी कविता और गज़ल भी तुम

सिने से लगा लूं मै तुमको,
और बाहों मे लेके प्यार करूं !
तुम्हे दिल मे छिपा के मै रखूं,
और राहों मे तेरा ईंतज़ार करुं !!

खुशियों के आंसू छलका के,
तेरी खुशबू मे मै तो समा जाऊं !
तुझे आंखो मे अपने बसा करके,
और गीत मिलन के मै गाऊं !!

तेरी जादुई जैसी ज़ुल्फ़ों को,
चेहर पे अपने घुमाता जाऊं !
मस्त बहारों के मौशम मे,
तुम्हे प्यार से मै सहलाता जाऊं !!

जिंदगी मेरी हो, और जीवन भी,
मेरी श्वांश और धड़कन भी तुम !
नील गगन कि परी हो तुम,
मेरी आश और तन-मन भी तुम !!

मेरी नींद तुम्ही,सुख-चैन भी तुम,
तुम मधुर राग शहनाई हो !
मेरी कविता और गज़ल भी तुम,
तुम मेरे जीवन मे रोशनी लायी हो !!

सिने से लगा लूं मै तुमको,
और बाहों मे लेके प्यार करूं !
तुम्हे दिल मे छिपा के मै रखूं,
और राहों मे तेरा ईंतज़ार करुं !!



मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-१८/१०/२००० ,वुद्धवार , शाम-.३५ बजे,
चंद्रपुर(महाराष्ट्र)


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