Saturday, 8 March 2014

अब प्राइवेट कम्पनियों की बाढ़ सी आ गई है

अब प्राइवेट कम्पनियों की, बाढ़ सी गई है,
जहां नित नई-नई, कम्पनियां खुल रही हैं
पैसे कमाने की चाहत मे,
ये अपने कर्मचारियों का, शोषण कर रही हैं

जलकुंभी  की तरह ये, उग रही कम्पनियां,
ये लोगों को बेवकूफ, बना रही हैं
बेरोजगारी का, लाभ उठाकर,
ये खुब पैसे कमा रही हैं

इण्डस्ट्रीज,फैक्ट्री,या हो कन्स्ट्रूक्सन,
या मार्केटिंग,बैंक, सिक्योरिटी हो
बीमा,सड़क या हो, मिडिया,
या किसी भी तरह, का ड्युटी हो

बड़े-बड़े ये बोर्ड लगाकर,
ये लोगों को बेवकूफ, बना रही हैं
पी,एफ,बोनस , समय से सैलरी,
ऐसी तरह-तरह की, बातों से लुभा रही हैं

पर कड़वी सच्चाई, यही है कि,
ये अपने वादे पर नही, उतरती हैं खरी
पी,एफ,बोनस की, बात ही क्या,
समय से नही, देती हैं सैलरी

गुण्डागर्दी के, बल पर ये,
अपनी कम्पनियां चलाते हैं
अपने रहते खुब, ऐशो-आराम मे,
पर कर्मचारियों का, खून पी जाते हैं

पर आज के इस महौल मे भी,
कुछ-कुछ कम्पनियां बहुत ही अच्छी है
वे हर मान दण्डों का रखती हैं ख्याल,
और कर्मचारियों की भी हितैषी हैं

अब प्राइवेट कम्पनियों की, बाढ़ सी गई है,
जहां नित नई-नई, कम्पनियां खुल रही हैं
पैसे कमाने की चाहत मे,
ये अपने कर्मचारियों का, शोषण कर रही हैं

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
22-08-2013,1am,thursday,(734),
pune,maharashtra.






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