Thursday, 13 November 2014

कभी किसी के रंग-रूप पर मत जावो

मत हंसी उड़ावो कभी उनका,
कल इनके अच्छे दिन भी आयेंगे
अभी दुःख के आंसू निकल रहे,
कल सुख के बहार भी आयेंगे

काले कोयले की खदान से,
हीरा भी उसी से निकलता है
जो कि अंधकार मे उजाला बनकर,
सबको आलोकित करता है

वर्तमान देखकर कभी किसी का,
भूल के मत परिहास करो
भविष्य सुनहरा जानकर उसका,
उसे कभी मत निराश करो

सुख-दुःख तो ये लगे रहते,
कल दुःख का बादल छंट जायेगा
सुर्यास्त आज हो रहा है तो क्या,
कल नया सवेरा आयेगा

किसी के रंग-रूप पर मत जावो,
उसके गुण का तो सम्मान करो
कभी किसी का वर्तमान देखकर,
भविष्य़ का मत उपहास करो
कभी किसी का वर्तमान देखकर,
भविष्य़ का मत उपहास करो......

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
21-01-2014,Tuesday,11:30pm,(836)
Pune,M.H
www.kavyapushpanjali.blogspot.in






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