Friday, 16 March 2018

"जिन्दगी के गीत गुनगुनाते चलें"

जिन्दगी के गीत गुनगुनाते चलें | 
दर्द को भुलाके मुस्कुराते चलें     ||
जिन्दगी के गीत........

सत्य की डगर में भगवान साथ हैं |
साहस के साथ हम कदम बढाते चलें ||
जिन्दगी के गीत........

सागर की तरह धीरता,गंभीरता लिए   |
अपने-पराये को गले लगाते चलें ||
जिन्दगी के गीत........

फलदार वृक्ष की तरह झुकना हमें आये |
परोपकारी बनके सुख लुटाते  चलें ||
जिन्दगी के गीत........

दुःख की काली रातें हो या सुख के हों दिन |
समभाव रहके कर्म सब निभाते चलें ||
जिन्दगी के गीत........

प्रेम की माला में मोतियों को पिरोकर |
नफरत की दीवारों को हम ढहाते चलें ||
जिन्दगी के गीत........ 

 कवि मोहन श्रीवास्तव
रचना क्रमांक ;-( 1074 )
 07-03-2018 , wednsday ,09:30 pm ,
vill :-Jheet ,Patan ,Durg (C.G )
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