Wednesday, 14 November 2018

''हे वीर तुम रणधीर हो'' ( मधुमालती छंद )

"हे वीर तुम रणधीर हो"
( मधुमालती छंद )

हे वीर तुम रणधीर हो | 
चलते रहो  रणवीर हो || 
माँ भारती के हीर हो  | 
रिपु के लिये यमतीर हो || 

भुज बंध पर अभिमान हो | 
बस जीत ही अरमान हो || 
हित देश बस यह प्राण हो || 
निज वतन पर बलिदान हो || 

जयचंद दल पहचान हो | 
उनकी जगह शमसान हो || 
बलवंत तुम गुणवान हो  | 
अरि वक्ष लहू लोहान हो || 

माँ भारती के लाल हो | 
तुम दुश्मनों के काल हो || 
हम सभी के तुम ढाल हो | 
रण में सदा बेताल हो || 

अरि लहू की नित प्यास हो | 
श्री विजय की बस आस हो || 
धैर्य सदा तव पास हो | 
माँ भारती के दास हो || 

जय हिन्द की ललकार हो | 
सदा वैरियों पे प्रहार हो || 
निज हाथ में औजार हो | 
दिन रात ही जयकार हो || 
हे वीर तुम रणधीर हो | 
चलते रहो  रणवीर हो || 
माँ भारती के हीर हो  | 
रिपु के लिये यमतीर हो || 


कवि  मोहन श्रीवास्तव 

रचना क्रमांक :- ( 1124 )
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