Wednesday, 26 June 2013

हमे गर्व है हमारी सेना पर

हमे गर्व है, हमारी सेना पर,
जो हमे हर,, मुश्किल से छुड़ाते हैं ।
हर संकट की, घड़ी मे वे,
हमारे प्राणों को, बचाते हैं ॥

सीमा पर, दुश्मनों से देखो,
या कोई दैवी आपदा हो ।
कहीं कोई महामारी हो या,
कहीं कोई लापता हो ॥

जान की बाजी, लगाकर वे,
हमे मौत के मुंह, से बचाते हैं ।
हर दुःख मे देखो वे,
हमारे साहस को, बढ़ाते हैं ॥

वायु सेना या हो नौ सेना,
थल सेना का तो, कोई जवाब नही ।
दुश्मनों से लोहा, लेते हैं ये,
हम कर सकते हैं, इनका बखान नही ॥

शत-शत बार, नमन है इन्हें,
और कोटि-कोटि, हमारी दुआएं ।
उम्र हो लम्बी इन सबकी,
और हर जगह विजय श्री पाएं ॥
और हर जगह विजय श्री पाएं ॥

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
21-06-2013,12.35 p.m,friday,
mahavir nagar,raipur.








Wednesday, 12 June 2013

"मंगलमय हो जन्मदिन आपका "

"मंगलमय हो जन्मदिन आपका" ,
व दिल के सपने साकार हों ।
जीवन मे सफ़लता कदम चूमें,
व सुख मय सदा परिवार हो ॥

कभी कांटा न चुभे,ठोकर ना लगे,
जब चलें आप कहीं राहों मे ।
जीवन मे हर पल उजाला हो,
व गूंजे नाम दिशावों मे ॥

सदा सन्मार्ग पर चलें आप ,
व बुराई की राहों से दूर रहें |
मोहन की दिल से यही कामना ,
खुशियों से सदा भरपूर रहें ॥
मोहन श्रीवास्तव (कवि)
http://kavyapushpanjali.blogspot.in/2013/06/blog-post_12.html
३-१-२०००,शाम ५ बजे,

चंद्रपुर,महाराष्ट्र



Tuesday, 11 June 2013

आम फलों का राजा है

दुनिया मे फल तो अनेकों हैं,
पर आम फलों का राजा है ।
सबके लगभग एक ही स्वाद,
पर आम का स्वाद निराला है ॥

तरह-तरह के रंग-बिरंगे,
इसकी बहुत सी किस्में हैं ।
खट्टे ,मीठे और रसीले,
तरह -तरह के, खुश्बू इसमे है ॥

हापुस-माल्दाह-तोतापारी,
लंगड़ा-दशहरी-सिंदुरी ।
कई नामों से, मिलता है ये,
जो स्वाद ये, करता है पुरी ॥

मुरब्बा-अचार या हो चटनी,
कई तरह की चीजें, इससे बनाये जाते ।
अमचुर-खटाई या अमरस,
प्यार से ये सब खाये जाते ॥

इसका पेड़ बहुत ही महान,
जो हमे सुन्दर छाया देता ।
हवनादि-पूजा मे इसका,
हर चीज काम है देता ॥

दुनिया मे फल तो अनेकों हैं,
पर आम फलों का राजा है ।
सबके लगभग एक ही स्वाद,
पर आम का स्वाद निराला है ॥

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-०१-०६-२०१३,शनिवार,
सुबह-७.३० बजे, पुणे ,महाराष्ट्र





Sunday, 9 June 2013

भोले बारात लेकर चले हैं


होके सवार नन्दी पे भोले,
व्याह गौरा संग रचाने चले हैं ।
उनके मुखड़े की अनुपम है शोभा,
भोले बारात लेकर चले हैं ॥
होके सवार नन्दी पे भोले....

तन भभुती रमाये हुये वो,
डम - डम डमरू बजा वो रहे हैं ।
कर मे त्रिशूल बाबा के सोहे,
भोले देखो तो शरमा रहे हैं ॥
होके सवार नन्दी पे भोले...

भोले बाबा के देखो बराती,
कोई किससे भी कम तो नही है ।
भूत - प्रेत - जोगी और जोगिन,
इनके रूप व रंग कई हैं ॥
होके सवार नन्दी पे....

कोई मोटे ,कोई तो हैं पतले,
कोई पैरों वाले हैं देखो ।
किसी-किसी के तो हाथ नही हैं,
कोई बहुत हाथ वाले है देखो ॥
होके सवार नन्दी पे ........

किसी-किसी के तो कान नही हैं,
कोई बहुत कान वाले हैं भाई ।
किसी-किसी के तो नाक नही हैं,
पर बहुत नाक वाले हैं भाई ॥
होके सवार नन्दी पे........

सभी नाच और कूद रहे हैं,
कोई आवाज़ डर के निकालें ।
उनकी गिनती तो करना है मुश्किल,
वे तो सबसे अलग व निराले ॥
होके सवार नन्दी पे......

कालों के भी महाकाल भोले,
अपनी लीला दिखा तो रहे हैं ।
सबको मोहने वाली है सुरत,
वे तो गिरिज़ा को रिझा जो रहे हैं ॥

होके सवार नन्दी पे भोले,
व्याह गौरा संग रचाने चले हैं ।
उनके मुखड़े की अनुपम है शोभा,
भोले बारात लेकर चले हैं ॥
होके सवार नन्दी पे भोले....

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjalai.blogspot.com
08-06-2013,saturday, 7 pm.
pune.maharashtra