Friday, 7 October 2011

जब अपनी वहा कोई साली हो

दिल खुश होता है वहा अपना,
जहां प्रकृति की सुंदर हरियाली हो !
ससुराल मे खुशी मिलता है तब.
जब अपनी वहा कोई साली हो !!

तीर्थों का फ़ल मिलता है वहां,
जहां मां-बाप के चरणों की धूल हो !
मां का आचल खिल उठता है,
जब लाल सा कोई फ़ूल हो !!

पति-पत्नी का प्यार और भी बढ़ता,
जहां नोक-झोक-के फ़ौव्वारे हों !
पूत कपूत वे हो जाते,
जहां हर -पल  उनकी दुलारे हों !!

रिश्तों मे दरार है जाता,
जहा पैसों का लेना-देना हो !
वह प्यार नही है टिक पाता,
जहां दोनो में आपसी समझ ना हो !!

सिद्धांत वहा नही रह पाता,
जहां स्वार्थ ने आकर घेरा हो !
ईज्जत वहां सुरक्षित रह पाता,
जहां शराबियों का हर-पल बसेरा हो !!


दिल खुश होता है वहा अपना,
जहां प्रकृति की सुंदर हरियाली हो !
ससुराल मे खुशी होता है तब.
जब अपनी वहा कोई साली हो !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक- १४/०३/२००१,बुद्धवार,सुबह , .१० बजे,
थोप्पुर घाट, धर्मपुरी(तमिलनाडु)






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