Tuesday, 4 October 2011

पर शराब है सबसे बुरा नशा

कोई भी नशा है ठीक नही,
पर शराब है सबसे बुरा नशा !
कई मंज़रों को ढहते देखा है हमने,
जिनके दिल मे है शराब बसा !!

धन की बर्बादी पहले करते,
फ़िर तन की बर्बादी बाद मे !
चरित्र गिर जाते है उनके,
फ़िर रहते हर-पल पश्चाताप मे !!

ईमान बेचते देखा है हमने,
और सम्मान से समझौता कर लेते !
देखा है हमने ऐसों को,
जो पत्नी-बेटियों का भी सौदा कर लेते !!

चंद बातों को लेकर हमने,
अपनों का खून बहाते देखा है !
लिव्हर सड़ जाने से उनके,
तड़प कर मर जाते हुए देखा है !!

मदिरा के नशे मे कभी-कभी,
उन्हे अपनी आबरू लुटाते देखा है !
भीड़ भरे बाज़ारों मे,
उन्हे अश्लीलता दिखाते देखा है !!

मत पियो शराब को तुम ऐसी,
जहां नफ़रत ही नफ़रत तुम्हे मिले !
विष के समान मदिरा पीकर,
जहां झूठी इज्जत तुम्हे मिले !!

कोइ भी नशा है ठीक नही.......

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
रचना की तारीख-१९/०२/२००१,दोपहर - १२.३५ बजे,

थोप्पूर घाट, धर्मपुरी,(तमिलनाडु)
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