Saturday, 29 October 2011

ऐ जीवन तेरे कितने रूप


ऐ जीवन तेरे कितने रूप,
कभी छाव, कभी तो धूप है!
पल भर मे कभी गम का साया,
कभी खुशी के रंग अनूप है!!

कदम -कदम पे संघर्ष है,
चाहे लाख बचे तू जमाने से!
कभी विषाद तो कभी हर्ष है,
जो खतम न हो आसू बहाने से!!

तू सोचे कुछ और क्या हो जाए,
तेरी चाल पलट जाए जीवन!
दिन मे  संग रहे वो तेरे,
पर रात मे बन जाए बिरहन!!

तू बस भूल-भुलैय्या मे भटकता रहे,
पर आश न छोड़ा है तुमने!
तू बस माया के बजरिया मे मचलता रहे,
जब तक श्वाश न छोड़ा है तन ने!!

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-२७/१२/२०००,वुद्धवार,रात्रि- १२ बजे
चंद्रपुर (महाराष्ट्र)
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