Tuesday, 29 November 2011

देवी गीत(नवरात्री का बेला बिता जाये)

नवरात्री का बेला बिता जाए
हे अम्बे मइया दर्शन दो....

मैया के लिए लाई लाल-लाल-चुंदरी
हाथों के लिए लाई सोने की मुंदरी
अपनी मैया को पहनाने आई
हे अम्बे मैया दरशन दो...
नवरात्री का बेला.............

तु तो मेरी मैया सब कुछ देती
दुखियों के विपदा को तु हर लेती
मेरी भी बिगड़ी बना दे
हे अम्बे मैया दर्शन दो
नवरात्रि का बेला.............

अन्धे को आंख देती,गूंगे को बोली
बाझन को पुत्र और कन्या को हम झोली
मेरी भी अभिलाषा पुरी कर दे
हे अम्बे मैया दर्शन दो
नवरात्रि का बेला.........

क्या मुझसे कोई गलती हुई है
क्यु तुम मा मेरी सुनती नही है
मै तो हु तेरे मा चरणों की दासी
हे अम्बे मैया दर्शन दो
नवरात्रि का बेला...............

आज संकट से मै मा घिरी हूं
लहरों के बीच मे मै आ फ़सी हूं
इन लहरों से बचा लो मा हमको
हे अम्बे मैया दरशन दो
नवरात्रि का बेला बिता जाए
हे अम्बे मैया दर्शन दो.............

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-२०/११/१९९१ ,बुद्धवार,सुबह ,.५० बजे,

चन्द्रपुर (महाराष्ट्र)

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