Sunday, 20 November 2011

तुम्हारे बिन नही जमती है आज ये महफ़िल

तुम्हारे बिन नही जमती है आज ये महफ़िल !
सुहाना वक्त है मौशम,तुम इसमे हो जावो शामिल !!
तुम्हारे बिन...

मैने पिया है आज बहुत जमकर के शराब !
पर मुझको नही मिलती है वो मशहुर शवाब !!
तुम्हारे बिन...

ये चांदनी रात है,तारे कर रहे झिलमिल !
तुम्हारी बाहों को चाहता है मेरा दिल !!
तुम्हारे..

अपनी- अपनी ख्यालो मे सभी मशगूल हो रहे !
वो मेरी जाने मन हम अपनी सवाल किससे करें !!
तुम्हारे बिन...

आज हमसे धोखा किया है क्युं तुमने !
तेरे एहसान का बदला मै कैसे चुकाउंगा !!
तुम्हारे बिन नही जमती...

रंग -महफ़िल नही ये तो कब्रीस्तान है !
मेरी हालत आज जैसे कोई शैतान है !!
तुम्हारे बिन नही जमती..

शोले उगलते है आज इन सबकी बातें !
दिये जलते है कैसे आज रह-रह कर !!
तुम्हारे बिन नही जमती....

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-२१//१९९१,मंगलवार,शाम,.५० बजे,

एन.टी.पी.सी.,दादरी,गाजियाबाद(.प्र





Post a Comment