Saturday, 15 March 2014

होली की खुशियां सदा बनी रहे

( आप सभी को मेरा प्रणाम, नमस्ते व प्यार
एवं होली की हार्दिक शुभ  कामनाएं )

होली का यह पावन पर्व ,
आप सभी को मुबारक हो !
ईन्द्र धनुष सा जीवन हो आपका,
और धन -बैभव की अच्छी आवक हो !!

कभी कांटा न चुभे पावों मे आपके,
और ना ही जीवन मे उदासी छाए !
मन की ईच्छा पुरी हो,
और सफ़लता सदा मुस्काती आए !!

सूरज की तपती ज्वाला हो या,
ठंडी- बर्फ़ीली हवाएं हो !
नए बहारों से हो सुसज्जित,
व मन की पूरी अभिलाषाएं हों !!

होली की खुशियां सदा बनी रहे,
व नित नई खुशी व प्यार मिले !
मोहन की दिल से यही कामना,
जीवन भर आपको बहार मिले !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)




दिनांक- २८/१०/१९९९,बृहस्पतिवार,शाम-५.१० बजे,

चंद्रपुर(महाराष्ट्र)

Sunday, 9 March 2014

विकास पुरुष नरेंद्र मोदी जी

वे शेरे दिल हैं भारत के,
वे गोली-बारूद से नहीं डरते ।
वे दुश्मनों की गीदड़-भभकी से,
कभी पिछे हटा नहीं करते ॥

गीदड़ों का काम है दहशत फैलाना,
पर शेर का काम आगे बढ़ना ।
अपनी मंजिल मिलने तक,
मरते दम तक है लड़ना ॥

डरना,धमकाना,दहशत फैलाना,
इनसे उनकी हताशा साफ झलकती है ।
पर मतवाला हाथी चलता रहता,
कुछ लोग शोर तो करते  रहते हैं ॥

बंब बिस्फोटों व धमकाने से,
ऐसे उनके हाथों को और मजबूती मिलेगा ।
अब हर दिल के मानसरोवर मे,
कमल का फूल ही खिला होगा ॥

विकास पुरूष नरेंद्र मोदी जी के,
हाथों को आवो मजबूत करें ।
सुंदर भारत को बनाने के लिये,
आवो हम अपना योगदान जरुर करें ॥
सुंदर भारत को बनाने के लिये,
आवो हम अपना योगदान जरुर करें......

मोहन श्रीवास्तव (कवि)






30-10-2013,Wednesday,08:50pm,(780),

Pune,Maharashtra.

Saturday, 8 March 2014

अब प्राइवेट कम्पनियों की बाढ़ सी आ गई है

अब प्राइवेट कम्पनियों की, बाढ़ सी आ गई है,
जहां नित नई-नई, कम्पनियां खुल रही हैं ।
पैसे कमाने की चाहत मे,
ये अपने कर्मचारियों का, शोषण कर रही हैं ॥

जलकुंभी  की तरह ये, उग रही कम्पनियां,
ये लोगों को बेवकूफ, बना रही हैं ।
बेरोजगारी का, लाभ उठाकर,
ये खुब पैसे कमा रही हैं ॥

इण्डस्ट्रीज,फैक्ट्री,या हो कन्स्ट्रूक्सन,
या मार्केटिंग,बैंक, सिक्योरिटी हो ।
बीमा,सड़क या हो, मिडिया,
या किसी भी तरह, का ड्युटी हो ॥

बड़े-बड़े ये बोर्ड लगाकर,
ये लोगों को बेवकूफ, बना रही हैं ।
पी,एफ,बोनस व, समय से सैलरी,
ऐसी तरह-तरह की, बातों से लुभा रही हैं ॥

पर कड़वी सच्चाई, यही है कि,
ये अपने वादे पर नही, उतरती हैं खरी ।
पी,एफ,बोनस की, बात ही क्या,
समय से नही, देती हैं सैलरी ॥

गुण्डागर्दी के, बल पर ये,
अपनी कम्पनियां चलाते हैं ।
अपने रहते खुब, ऐशो-आराम मे,
पर कर्मचारियों का, खून पी जाते हैं ॥

पर आज के इस महौल मे भी,
कुछ-कुछ कम्पनियां बहुत ही अच्छी है ।
वे हर मान दण्डों का रखती हैं ख्याल,
और कर्मचारियों की भी हितैषी हैं ॥

अब प्राइवेट कम्पनियों की, बाढ़ सी आ गई है,
जहां नित नई-नई, कम्पनियां खुल रही हैं ।
पैसे कमाने की चाहत मे,
ये अपने कर्मचारियों का, शोषण कर रही हैं ॥

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
22-08-2013,1am,thursday,(734),
pune,maharashtra.