Sunday, 23 October 2011

बेइमानी की राह पे

बेईमानी की राह पे,चल पड़ा ईंसान आज,
हर जगह बेईमानी, का ही बोल-बाला है !
धूर्तता -चालाकी सबके ,भर गया दिमाग मे,
बाहर से सफ़ेद, मगर अन्दर से काला-काला है !!

पैसों के खातिर जिस्म, बिक रहा बाजार मे,
तो धर्म के नाम पर ,कमाई ही कमाई है !
झूठ-मूठ प्रवचन देते ,कई इस संसार मे,
आस्था के नाम पर, ठगाई ही ठगाई है !!

कई भ्रष्ट मक्कार ,घुसें है सरकार मे,
जहां लाखों -करोणों का, हवाला किया जाता है !
ठगी हो रहा है आज, शिक्षा के दरबार मे,
वहा भी कई तरह से ,घोटाला किया जाता है !!

सरकारी विभागों का, हो गया है बुरा हाल,
वहा तो बस पैसों का, सवाल रखा जाता है !
अब तो निजी संस्थानो मे, हो रहा है चलन आज,
वहां भी तो रिश्वतों का, जाल बुना जाता है !!

जन-तंत्र बन गया है, आज देखो भ्रष्ट तंत्र,
जहां देखो वहां बस ,दिखता भ्रष्टाचार है !
सिधे-सादे ईंसानों का, रो रहा है दिल आज,
उनके लिए चारो तरफ़, कांटो का ही हार है !!

लगभग हर वस्तुवों मे ,हो रहा मिलावट आज,
मिलावट खोरों का, बढ़ रहा साम्राज्य है !
बेईमानी का तांडव ,हो रहा संसार मे,
ये हम सब के लिए, बड़ा ही दुर्भाग्य है !!

बेईमानी की राह पे, चल पड़ा ईंसान आज,
हर जगह बेइमानी, का ही बोल-बला है !
धूर्तता-चालाकी सबके, भर गया है दिमाग मे,
बाहर से सफ़ेद, मगर अन्दर कला-काला है !!



मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-२०/०२/२०११,

रविवार सुबह -:५०बजे,रायपुर (..)
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