Wednesday, 16 November 2011

आराधना


हे महामहिम माता मेरी,
तेरे दर्शन को आया हूं!
बालक मै अग्यानी मा,
तेरे चरणो मे आया हू!

श्री मा तुम हो परमब्रह्म,
ब्रह्मा,विष्णू व सत्य-शिवम!
मैया तु कॄपा करो मुझ पर,
मै आया हू तेरे दर पर!!

हे धीर बुद्धि जननी मेरी,
अब दया करो अम्बे मेरी!
मै तुझको शिश नवाता हू,
मै कैसे गीत सुनाता हू!!

अब जागो-जागो आखे खोलो,
मेरे गीतो को तुम सुन लो!
मै पुष्पों कि माला लाया हू,
मां तुझे चढ़ाने आया हू!!

मइया अब तो तुम दया करो,
दर्शन दे दो ना देर करो!
तू सरस्वती-दुर्गा-काली,
तू श्यामा-अम्बा-श्यामाली!!

मै जय-जय कार करू तेरी,
तुम रूठी हो क्यू मा मेरी!
मै इधर-उधर भटकता,
पर कोई मेरी मदद न करता!!

मै असहाय-दुखियारी हू,
मै क्या-क्या दुख को तुम्हे कहू!
हे जगतजननि-अन्तर्यामिन,,
तू ही हो मा मेरी स्वामिन!!


मेरे पापो को क्षमा करो,
अब तो मा मेरा उद्धार करो!!

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-३०/०३/१९९१,शाम,४.०५ बजे,
एन.टी .पी सी.दादरी,गाजियाबाद(उ.प्र.)

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