Monday, 17 October 2011

ये दुनिया है कैसी ,जहा रोग हि रोग लगे



ये दुनिया है कैसी ,
जहा रोग ही रोग लगे!
इक रोग खतम हो तो,
दूजा और रोग लगे!!

कहि ईश्क का रोग, कहि प्यार का रोग,
कहि भोग का रोग लगे!
कहि दॄष्टि का रोग,कहि ज्वर का रोग,
कही योग का रोग लगे!!

कहि मान का रोग,कहि अभिमान का रोग,
कहि ध्यान का रोग लगे!
कही आन का रोग,कहि ध्यान का रोग,
कही ग्यान का रोग लगे!!

कहि भक्ति का रोग,कही शक्ति का रोग,
कहि संतान का रोग लगे!
कहि युक्ति का रोग,कहि मुक्ति का रोग,
कही सम्मान का रोग लगे!!

कहि सुख का रोग ,कहि दुख का रोग,
कही धन का रोग लगे !
कहि मुख का रोग,कही भूख का रोग,
कही मन का रोग लगे!!

कहि भूत का रोग,कहि प्रेत का रोग,
कही शक का रोग लगे!
कहि सूद का रोग,कहि क्रोध का रोग,
कही कर्ज का रोग लगे!!

ये दुनिया है कैसी,
जहा रोग हि रोग लगे!
इक रोग खतम हो तो,
दूजा और रोग लगे!!....

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-२४/१०/२००० ,मंगलवार-दोपहर-३.३० बजे
चंद्रपुर(महाराष्ट्र)
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