Monday, 14 November 2011

फ़िर भी मेरा भारत महान

चारों तरफ़ है हा-हा कार,
मंहगाई और भ्रष्टाचार !
हर एक ओर है लूट मचा,
फ़िर भी मेरा भारत महान !!

बेईमानी व रिश्वतखोर,
बढ़ रहे जुआरी और चोर !
हो रहे अपहरण व बलात्कार,
फ़िर भी मेरा भारत महान !!

धर्म के नाम पर अन्धबिश्वाश,
लोगो मे दौलत की प्यास !
सरकार मे है अबिश्वाश,
फ़िर भी मेरा भारत महान !!

चोरी-डाका-लूट- पाट,
दहेज की जलती हुई है आग !
दिखा रहे सब झूठी शान,
फ़िर भी मेरा भारत महान !!

बगल मे छूरी मुख मे राम,
हो रहे रोज है कत्लेआम !
मासुमों का ले रहे है जान,
फ़िर भी मेरा भारत महान !!

बढ़ रहे हैं देखो बेरोजगार,
काम के बदले नही मिलता पगार !
सत्य पे चले जो ,वो हो परेशान,
फ़िर भी मेरा भारत महान !!

चारों तरफ़ है हा- हा कार,
मंहगाई और भ्रष्टाचार,!
चारों तरफ़ है लूट मचा,
फ़िर भी मेरा भारत महान !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक- २२/०२/२०११,मंगलवार,शाम, .१० बजे,

वारासिवनी,बालाघाट(एम.पी)
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