Monday, 14 November 2011

कुदरत ने दिल से बनाया तुम्हे

कुदरत ने दिल से बनाया तुम्हे,
जो देखे तुम्हारा हो जाए !
तुम जिससे भी कभी बातें करो,
वो सपनो मे तेरे खो जाए  !!

हिरनी सी चाल,रेशम से बाल,
हर अंग तो कितने सुनहरे है !
गुलाबी सी गाल,तुम हो सवाल,
तेरे नयना शाम-सबेरे है !!

तेरे वक्षस्थल नदियों मे उफ़ान,
जो की लोगों की धड़कन बढ़ा देते !
अंगड़ाई तेरे लेने से,
लोग अपनी शांसे  चढ़ा लेते !!

दुईज सी चांद भौहें तेरी,
नाजुक सी कलाई वाली हो !
लचकाती कमर-फ़ूलों सा अधर,
तुम तो कितनी मतवाली हो !!

आंखों के नुकिले काजल से,
जो कि चार चांद लग जाते है !
कानों के झुमके से तो,
गुलशन मे बहार जाते हैं !!

नाक की नथिया से तेरे,
सूरज भी शर्मा जाता !
मुखड़ा गुलाब सा है ऐसा,
जिसपे चांद भी सर को झुका जाता !!

पल्लू से झांकता नाभी तेरा,
जैसे ईंद्रधनुष का नजारा हो !
पावो मे पायल की छन-छन,
जो कि आशिकों कि ओर ईशारा हो !!

खन-खन चूड़ी पिपल पत्तों जैसी,
जब मुस्काती तो धूप है !
तुम नील गगन की परी ही हो,
जिसके तो कई रूप है !!

चंदन सा बदन तुम कितनी सुंदर,
तुम रूप का कोई खज़ाना हो !
तुम्हे पाने की आश मे लम्बी कतार,
चाहे आशिक कोई अंजाना हो !!

कुदरत ने दिल से बनाया तुम्हे,
जो देखे तुम्हारा हो जाए !
तुम जिससे भी कभी बातें करो,
वो सपनों मे तेरे खो जाए !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-२२/०७/२००५,शुक्रवार,रात्रि बजे,

खरोरा,रायपुर( ..)

Post a Comment