Monday, 21 November 2011

गजल(मै तुम्हारी राह मे बैठा रहा)



मै तुम्हारी राह मे बैठा रहा!
तुम नही आए तो कैसा लगा!!
तुम झूठे वादे करके सोती हो!
और झूठे आसू बहाकर रोती हो!!
हम तुम्हारे चाहने वाले यार है!
तुम नही मिलती तो सब बेकार है!!
हम अपने नसीब पर रोते रहे!
हम तुम्हारी याद मे खोते रहे!!
आज मेरा वक्त है सहमा हुआ!
उनको देखा तो मुझे सदमा हुआ!!
हम आसू को पिकर रह जाते है!
तुम्हारी बातो को हम सह जाते है!!
मै तुम्हारी रह मे बैठा रहा!
तुम नही आई तो हमे कैसा लगा!!
मै तुम्हारी...

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-६/६/१९९१ ,बॄहस्पतिवार,शाम  - ६ बजे,
जोगापुर , वाराणसी (उ.प्र.)
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