Monday, 21 November 2011

गजल(शराब आज हमने जी भर के पि ली है)



समझ मे नही आता मै क्या करू
बादलो की तरह  मै भटकता फ़िरु!
मै अच्छे-बुरे को समझता नही
कोई मुझको बतावो कि मै क्या करु!!

शराब आज हमने जी भर के पी ली है!
ये सुखा दिल मगर बदन अभी गिली है!
शराब आज मैने जी भर के ...
ये हमने पिया है गम को भुलाने के लिए
मगर ये हमको अधिक गम को दिए जाता है!!
शराब आज हमने ...
ये हमने चोरी से पी है मगर पता सबको
इसके पिने से मेरा दिल खुश हो जाता है!!
शराब आज हमने...
छोड़ना चाहा बहुत अब इसे न पिउंगा
मगर मै इसकी तरफ़ और खिचा जाता हु!!
शराब आज हमने...
मुझको कहते है लोग ये बड़ा शराबी है
उनके कहने से मै और पिए जाता हु!!
शराब आज हमने..
इसकी खुशबु मुझे दिन -रात कर रही घायल
मै इसके पिछे हमेशा ही पड़ा रहता हु!!
शराब आज हमने...
मेरी बदनामी भी इससे हो रही शायद
फ़िर भी मै सबकी बातो को सहे जाता हु!!
शराब आज हमने जी भर के ...
अंधेरी रात मे चन्दा की तरह लगती है
इसके पिने से शरम चीज चली जाती है!!
इसका एहसान बहुत है मुझ पर
जब कि मै इसकी नजरो से गिरा जाता हु!!
शराब आज हमने जी भर के पी ली है...

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-३/७/१९९१ ,बुद्धवार,रात्रि ९.५० बजे,
एन.टी.पी.सी.दादरी,गाजियाबाद(उ.प्र.)
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