Sunday, 4 December 2011

गजल(ऐ जाने वाले लोगों ,मुझे छोड़कर गये क्युं )


ऐ जाने वाले लोगों  ,मुझे छोड़कर गये क्युं  !
मै राह मे खड़ा था,मुह मोड़ कर गए क्युं  !!
ऐ जाने................

की थी मैने क्या खता ,जो मुझे साथ ना लिये !
मागा था हमने और कोई,तुमने कुछ दिये !!
ऐ जाने..................

हम ना समझ सके है ,थी कौन ऐसी बातें  !
हम सोच-सोच करके ,जगते है सारी रातें  !!
ऐ जाने..............

ये अकेला हु मै यहा पे, कोई साथी ना हमारा !
मैने तो अपना सब कुछ, इस जिन्दगी मे हारा !!
ऐ जाने.............

हमको तो यारो तुमने, दोस्त ही कहा था !
पर मै बन गया मै दुश्मन ,लगता है इस जहां  का !!
ऐ जाने..........

ये भी नही बताया कि ,तुम कहां  गये !
हम देखते ही रह गए, और तुम चले गए !!
ऐ जाने..............

हमको भी अपने पास, बुला लो किसी  तरह !
या हमे बता दो ,इसकी है क्या वजह !!
ऐ जाने...............

देखो तुम्हारा मोहन ,कुछ ना समझ सका है !
ये आखें  हंस  रही है ,पर दिल तो रो रहा है !!
ऐ जाने वाले लोगो...................

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-०२/०१/१९९२ ,बॄहस्पतिवार ,रात ,८.०५ बजे,
चन्द्रपुर (महाराष्ट्र)

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