Thursday, 8 March 2012

आवो सब जन खेलें होली

आवो सब जन खेले होली,
सुनो गांव की गोरी,
चलो कान्हा को रंग से भिगाएंगे !
ले लो अबीर -गुलाल ,
उसके सांवरे है गाल,
उसके गालों मे गुलाल लगाएंगे !!
आवो सब जन खेलें.....

वो है माखन चोर,
देखो नन्द किशोर,
वो तो रास रचइया कहाता है !
सिर मे मुकुटा बिराजे,
देख के काम भी लाजे,
उसे जहां भी बुलावो  चला आता है !!
आवो सब जन खेले होली...

सुन के मोहन की मुरलिया,
चमके दिल मे है बिजुरिया,
सब जन दौड़े चले वहा आते है !
वो तो लिला दिखाए,
कैसे सबको है भरमाए,
सब मन मांगी मुरादे पाते है !!
आवो सब जन खेले होली..

चलो जल्दी रे सहेलियां,
बजे श्याम की बसुरिया,
उसे रंग लगा के रिझाएंगे !
उसे मारो रे पिचकारी
,दिल मे उसके लगे रे करारी,
अपने सांवरो को आज नचाएंगे !!
आवो सब जन खेले होली......

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com

१४//२०००,चन्द्रपुर,महा.


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