Thursday, 8 March 2012

आखिरी वक्त

आखिरी वक्त है जिन्दगी का मेरे,
इस जीवन का कोई ठिकाना नही !
श्वांश पल-पल घड़ी दो घड़ी की ही है,
प्राण जाने से आना दुबारा नही !!
आखिरी वक्त ...........

मेरे हम राही ,हमदम ,मेरे हमसफ़र,
अब जुदा होने की तो घड़ी आ गई !
जिन्दगी मौत के बीच अटकी हुई,
अब बिदा होने की तो घड़ी आ गई !!
आखिरी वक्त........

मेरे चिलमन,नशेमन ,मेरे जाने मन,
प्यार से तो तू, इक बार लग जा गले !
तेरा मिलना,बिछुड़ना मुबारक तुम्हें,
अब बिदा होने की, तो घड़ी आ गई !!
आखिरी वक्त............

खुश रहो तुम,जहा भी रहो हमसफ़र,
फ़ूल जैसे तुम मुस्कुराते रहो !
याद आए तो मोहन की तो,छिपकर रोना नही,
अब जुदा होने की तो, घड़ी आ गई !!

आखिरी वक्त है जिन्दगी का मेरे,
इस जीवन का कोई ठिकाना नही !
श्वांश पल-पल- घड़ी दो घड़ी की ही है,
प्राण जाने से आना दुबारा नही !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
२५//१९९९,रात्रि ८.३५ बजे,

चन्द्रपुर, महा.

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