Saturday, 4 May 2013

धूल तेरे चरणों का मइया

धूल तेरे चरणों का मइया,
मिल जाये तो कृपा होगी
मुझ निर्धन ,दुखियारी पर मां,
बहुत बड़ी तो दया होगी
धूल तेरे चरणों का........

पूजा का हमे ग्यान नही मां,
ना ही तेरी स्तुति आता
तेरी भक्ती के सिवा हमे मइया,
कुछ भी तो है नही आता
धूल तेरे चरणों का.........

है मेरे पास नही कुछ माता ,
बस श्रद्धा के है आंसू
तेरे दरश की प्यास बड़ी है,
अपना दरश तो दिखा जा तू
धूल तेरे चरणों का.........

तू ही हो मा सूरज-चन्दा,
नील गगन और हो धरती
हमसे हो मां क्यों रूठी तुम,
हमपे दया नही क्यों करती
धूल तेरे चरणों का.....

आदि-अन्त हो तू ही माता,
तू ही भाग्य बिधाता हो
दूर करो मेरे दुःख को मां,
तेरे चरणों मे शीश झुकाता हूं

धूल तेरे चरणों का मइया,
मिल जाये तो कृपा होगी
मुझ निर्धन दुखियारी पर मां,
बहुत बड़ी तो दया होगी
धूल तेरे चरणों का........

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
१२--२०१३,शुक्रवार, बजे,

पुणे.महा.
 
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