Saturday, 4 May 2013

माँ मत मारो मुझे अपनी कोख में


माँ मत मारो मुझे अपनी कोख मे,
पापा मत इतने निर्दयी बनो
मै लाडली बेटी हूं आपकी,
मेरी चीख पुकार कहीं तो सुनो

मम्मी जब मै आउंगी,
मै कभी ना तुम्हे रुलाउंगी
पापा जब आयेंगे कहीं से तो,
मै उन्हे पानी लाके पिलाउंगी

मै घर का सब काम करुंगी,
और पढ़ाई भी होगी
आप सब को मै आराम भी दुंगी,
और कढ़ाई भी होगी

जब घर मे मेहमान है आये,
तब उन सब की सेवा करुंगी मै
भाई की रहुंगी प्यारी बहन,
और अपना दुख कभी कहुंगी ना मै

मत लो मम्मी जान हमारी,
अब हमपे तो रहम करो
मै हुं आपकी प्यारी बिटिया,
हमे जीते जी ना कतल करो
मै हुं आपकी प्यारी बिटिया,
हमे जीते जी ना कतल करो ....
मत मारो मा...........

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
२४--२०१३,वुद्धवार,.४० शाम,

पुणे .महा



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