Wednesday, 28 September 2011

आज कितना है दिन ए सुहाना

आज कितना है दिन सुहाना,
अपनी मइया जी घर रही हैं
अपनी खुशियों का ना कोई ठिकाना,
वो अपने चरणों की रज ला रही हैं
आज कितना है दिन.......

आखें कब से बिछाये थे हमने,
अम्बे आयेंगी अपनी जिधर से
है दरश को ये कब से हैं प्यासे,
अम्बे आयेंगी जाने किधर से
आज कितना है दिन.......

लाल चोली मे लिपटी है माता,
सिंह पे है सवारी तो उनकी
अष्टभुजा धारी मेरी मइया,
हैं वो दुलारी तो हम सभी की
आज कितना है दिन.......

कर मे त्रिशूल, खप्पर है माँ के,
माथ पे माँ के चन्दा बिराजे
पुष्प का हार माँ के गले मे,
सोने का छत्र सिर पे है साजे
आज कितना है दिन.......

गई माँ है आज अपनी,
आओ आरती माँ के सब जन उतारो
हम गरीबों की झोली मे मइया,
अपने आशिष का वर तुम डारो

आज कितना है दिन सुहाना,
अपनी मइया जी घर रही हैं
अपनी खुशियों का ना कोई ठिकाना,
वो अपने चरणों की रज ला रही हैं
आज कितना है दिन.......

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
01-08-1999,sunday,7.15pm,
chandrapur,maharashtra.



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