Saturday, 19 November 2011

आ जावो मेरे सइया


कोई बहाना करके  जावोगे कहा
आ जावो मेरे सईया नीद न आय...
तुम जो जावोगे तो मै रूठ जाउंगी
तुम जो छोड़ोगे तो मै टूट जाउंगी
कोई बहाना...
इस अधेरी रात मे तुम नही जावो
आ जावो मेरे बलम मुझे ना सतावो
कोई बहाना...
मै हु तुम्हारी सइया तुम हो हमारे
कोई नही मेरा,तू ही तो किनारा
कोई बहाना...
मै अपनी सेजो को सजाई हू कबसे
जब से गए हो प्रीतम तुम इस घर से
अब ना करावो ईन्तजार मुझे
कोई बहाना..
ये कैसा लग रहा हम दोनो का वियोग
सुनी पड़ी है मेरी वर्षो से गोद
ठुकरा रहा है मुझे सारा संसार
कोई बहाना करके...
मै हु तुम्हारी पिया तुम हो मेरे
रात-दिन सब कोई मुझे कैसे छेड़े
कैसे ललचाए मुझे सब बार-बार
कोई बहाना...
तुम्ही मेरे गुलशन के माली हो साजन
तुम्ही हो मेरे पिया प्यार के आंगन
इस आंगन मे मुझे चाहे जैसे रख लो

कोई बहाना...
तेरे लिए मै अपना घर-द्वार छोड़ी
तेरे लिए मैने सबसे नाता तोड़ी
मुझसे ये दुख अब सहा नहि जाय
कोई बहाना...
हम-तुम मिलते थे पिया कभि-कभि कैसे
जैसे शाम के वक्त मिले सूरज-चाद जैसे
अब तो ना मुझे ऐसे ठुकरावो
कोई बहाना करके जावोगे कहा...
मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-२०/५/१९९१
एन.टी.पी.सी दादरी,गाजियाबाद (उ.प्र.)
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