Saturday, 15 October 2011

हीरो बनने के फ़ैशन मे

हीरो बनने के फ़ैशन मे ,


वे अपने संस्कृति को भुलाते जाते हैं !
डिस्को- पाप पे कमर मटकाते ,
पर पढ़ने-लिखने से घबराते हैं !!

फ़िल्मी नशा है दिल मे उनके ,
और उन्हे इश्क का रोग लग जाता है !
हर जगह ही फ़िल्मो की चर्चा करते ,
और उन्हे प्यार का भूत सताता है !!

पढ़ाई का बहाना करते-करते ,
वे लव का पहाड़ा पढ़ते हैं !
बेहयायी की मदिरा पिते-पिते,
वे सपनो की चढ़ाई चढ़ते हैं !!

मदहोश जवानी मे अन्धे हो,
वे अपनी पहचान भुला रहे हैं !
अपने भविष्य की चिंता नही उन्हे ,
वे अपनी तकदीर जला रहे हैं !!

तरह-तरह के नशे का सेवन कर,
वे स्व्यम नशा बन जाते हैं !
गलतियां अभी करते-करते ,
फ़िर आखिर मे पछताते हैं !!
गलतियां अभी करते-करते ,
फ़िर आखिर मे पछताते हैं.....

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-२२/०७/२००० ,शनिवार ,दोपहर - १२.१० बजे ,
चंद्रपुर (महाराष्ट्र)


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