Saturday, 15 October 2011

जीत के लिए तरसते है हम


खेलों मे खेल क्रिकेट खेल ,
जिसके सामने सभी खेल फ़ीके पड़ जाते है !
गर्मी-बरसात या जाड़ा हो,
इसकी बुखार से सभी अकड़ जाते है !!

तारीख मैच कि रखे जाने से ,
लोग परिणाम कि तैय्यारी करने लगते !
इंडीया ए मैच जितेगा ,
इस गणित मे सभी उलझे रहते !!

पर गणित फ़ेल हो जाते है सबके ,
जब ए हमे हार का स्वाद चखाते हैं !
बेशर्मी की चादर ओढ़कर ये,
चैन की नींद सो जाते हैं !!

बल्लेबाज़ी का हाल मत पूछो ,
तुम चलो हम भी आते है !
गेंद बाजी मे होती धुनाई ,
फ़िर ए गेंदे फ़ेकने से घबराते हैं !!

लगता है ये देश के लिए खेलते है कम ,
और पैसों के लिए खेलते जादा हैं !
जीत के लिए तरसते है हम ,
पर ये हारने पर ही आमादा हैं !!

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-२९/०३/२००० ,वुद्धवार ,शाम ७ बजे
चंद्रपुर (महाराष्ट्र)
Post a Comment