Saturday, 15 October 2011

ज़रा उनके भी घरों मे झाक कर देखो


जरा उनके भी घरों मे झांक के देखो ,
जिनकी पेट की भूख नही मिट पाती !
मां जब कुछ खाने को ले आती ,
तब बेटी मा के कपड़ों मे बाहर जाती !!

दो ही कपड़ों को मा -बेटी, और,
बाप-बेटे बारी -बारी से पहनते हैं !
जब आज मिला तो कुछ खा वो लिए,
नही भूखे पेट ही वो रहते हैं!!

हम अपने धार्मिक स्थलों को ,
सोने -चांदी से सजाते हैं !
हमे स्वर्ग मे सुख आराम मिले ,
हम यह सोच के वहां धन को लुटाते हैं !!

भूखों को भोजन नंगों को वस्त्र दें ,
पहले यह काम हमारा हो !
ज़रुरत मंदों की सेवा करना ,
यह दिल की आवाज हमारा हो !!

ऐसे लोगों कि सहायता करने से ,
आपका दिल खुशियों से भर जाएगा !
परमेश्वर भी खुश होंगे आप से ,
और आपका जीवन धन्य हो जाएगा !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-१६/०६/२००० , शुक्रवार,सुबह - .१० बजे

चंद्रपुर (महाराष्ट्र)



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