Monday, 28 November 2011

आराधना(मइया रुठी हो क्यु,बताती नही)

मइया रुठी हो क्युं,तुम बताती नही
मुझसे गलती हुई कौन मां ।
मै विनती करु तुम सुनती नही
तुम सोई हुई हो क्या मां ॥

इस अभागे पर मां तुम दया करो
ये कबसे पुकारे तुझे
ये द्वारे तेरे कब से आया हुआ
तुम कुछ बोलती नही मां

अम्बे कुछ भी नही है तेरे सिवा
सारे जग की हो तुम एक मां
मुझे भक्ती दे दो,मुझे शक्ती दे दो
मुझ पर भॄकुटी तुम फ़ेरो मां

मै  ढुढ़ूं तुम्हें ,तुम खोई कहा
अपनी दरश दिखा दो तु मां
मै बन-बन फ़िरुं-कैसे सबसे घिरुं
मुझे आके बचा लो तुम मां

आज संकट खड़ा मेरे सामने मां
इस संकट से मुक्ती दिला दो
मेरा कोई नही बस तेरा आसरा
इस बालक की सुन लो पुकार
 मइया रुठी हो क्युं.................

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-//१९९१ ,सोमवार
शाम - .३५ बजे,

एन.टी.पी.सी. ,दादरी,गाजियाबाद ,(.प्र.)
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