Monday, 28 November 2011

छुट्टी


यदि कल मुझे छुट्टी मिल जाती
तो आज अपने घर पर रहता
अपने मा-बाप-भाई-बहनो से
बहुत सी बाते करता
और गाव-घर मे सबसे
 मिल-जुलकर बाते करता
तरह-तरह के पकवानो को खाता
खेतो मे घुमा-फ़िरता
गावो के लोग मुझसे पुछते
भइया तुम कब आए
कैसी रही तबियत तुम्हारी
और क्या-क्या लाए
तब मै कहता उन सब से
जो जिस पद लायक रहता
उन सब को उचित सम्मान दे-दे कर
अपने हाल-चाल को कहता
अपनी जन्म भुमि प्यारी सी
जिसका कोई नही है शानी
यह है अपनी मा से बढ़कर
और सभी तिर्थो की रानी
कोई नही छोड़ना चाहता
अपना जन्म स्थान
पर अपने पेटो के खातिर
जाते दूर स्थान
याद आते हम परदेशी को
अपना घर और अपना देश
पर मजबुरी मे जा नही सकते
केवल यादे भर ही शेष
यदि कल मुझे छुट्टी मिल जाती............

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-८/९/१९९१ ,रविवार ,शाम-६.२० ,बजे,
एन.टी.पी.सी.दादरी ,गाजियाबाद(उ.प्र.)
Post a Comment