Monday, 28 November 2011

आसु भरे गीत(मुझे इसने कैसे लुटा)

मुझे इसने कैसे लूटा,मै किस तरह बताऊं ।
इसे देख-देख करके मेरा दिल जल रहा है ॥
मुझे इसने कैसे लूटा...........

मै तन से इसको चाहूं,ये मेरी बदनसिबी ।
मै नसीब वाला होता, तो ऐसा कैसे होता ॥
मुझे इसने................

मुझे इससे ऐसी नफ़रत,जिसे कह नही मै सकता ।
इसके पास जाते जाते,मेरा दिल है रोने लगता ॥
मुझे इसने..............

मैने जब कभी भी सोचा,मुझे रास्ता न मिलता ।
मेरे आंसू नही निकलते,अन्दर ही जलते रहते ॥
मुझे इसने.............

मैने जिसको-जिसको चाहा,वो मुझे नही है मिलता ।
थी मेरी कुछ तमन्ना,जिसे पाके मै  भी खिलता ॥
पर खुदा है मुझसे रुठा ,मै किस तरह बताऊं
मुझे इसने................

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-१३//१९९१,
शाम ८.१० बजे,शुक्रवार,
एन.टी.पी.सी.दादरी ,गाजियाबाद (.प्र.)


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