Friday, 18 November 2011

सपनो का राजकुमार


वह कैसा होगा
मेरे सपनो का राजकुमार
वह कैसे आए मेरे पास
मै उसे चूमूं बार-बार
वह सुन्दर-सुशिल-नौजवान
उसके भी होगे बहुत अरमान
मै उसके सपनो को और
उसके ईच्छावों की आश
काश ! मै पूरा कर पाती
उसके सपनो को सजाती
वह सेहरा बांध के आएगा
मुझे अपनी डोली मे ले जाएगा
मै उसे पूजुंगी दिन-रात
उसकी मानुंगी हर बात
मै हूंगी वहा अकेली
मेरी संग ना सहेली
मुझे ना किसी का वहा सहारा
वही होगा मेरा किनारा
मै रात भर न सोई
तुम्हारे सपनो मे ही खोई
वह कभी न हो उदास
मेरा सदा यही प्रयास
वह होगा मेरा सूरज
मै बनुंगी उसकी चांद
वह चाहे भी जहा हो
आएगा मुझे याद
वह होगा कैसा शर्मीला
जैसे कोई कमल सजीला
रीझेगा वह मुझ पर
खिजेगा वह हसकर
मै उसे करुंगी परेशान
वह होगा मुझ पर मेहरबान
उसका सलोना दिल
कैसे भी जाए मिल
मै उसे कहकहे सुनाउंगी
उसे नाच कर दिखाउंगी
वह झुमेगा मेरे साथ
मै उससे करुंगी बहुत बात
वह बनेगा मेरा उपमा
मै बनुंगी उसकी प्रतिमा
मै कल्पना मे खोई
मै रात भर न सोई
कैसे मेरे सपने
क्या होंगे वे अपने
मै सोचू दिन रात
कब पुरे होंगे सौगात
शायद मेरे सोचने का ढंग
उसको आए न पसन्द
तो मै क्या करुंगी
वो जैसे कहेगा
वैसे ही रहुंगी

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-१५/४/१९९१,
एन.टी. पी.सी.दादरी ,गाजियाबाद(उ.प्र.)

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