Friday, 18 November 2011

आराधना(भगवान शिव जी की)

जय भोले त्रिपुरारी ,प्रभु विनती सुनो हमारी ।
बाल-वॄद्ध नर-नारी, हम सब है दुखियारी ॥

एक आसरा है तेरा प्रभु दूजा नही सहारा ।
पार करो मेरे नइया को सूझे नही किनारा ॥
सिर पर गंग गले मे भुजंग ।
भस्म मे लिपटे तेरे अंग-अंग   ॥
हस्त त्रिशुल बाघम्बर धारी
जय भोले त्रिपुरारी प्रभु विनती सुनो हमारी

संग मे माता गौरी बिराजे, पार्वती जग जाना ।
राम-राम कहते हो तुम प्रभु ,राम भक्त सब जाना ॥
जिसके बुढ़े बैल की सवारी
जय भोले त्रिपुरारी प्रभु बिनती सुनो हमारी

इस माया की दुनिया मे प्रभु हम सब भटक रहे है ।
तुम्हरी कॄपा चाहते है प्रभु हम सब अटक रहे हैं ॥
हे दुखियों के अधिकारी
जय भोले त्रिपुरारी प्रभु विनती सुनो हमारी

हम बालक है अग्यानी प्रभु ,तेरी पुजा का नही ग्यान ।
तेरे दरश चाहते है प्रभु एक यही अरमान ॥
भाल चन्द्रमा तोहे बिराजे हे प्रभु डमरूधारी
जय भोले त्रिपुरारी प्रभु विनती सुनो हमारी

तेरे रूप अनेको है प्रभु जाने कोई-कोई ।
वही जान सकता है तुम्हे प्रभु जा पर कॄपा तुम्हारी होई ॥
मै मूरख अग्यानी , प्रभु तुम सर्वस हो दानी
जय भोले त्रिपुरारी प्रभु विनती सुनो हमारी

सॄष्टि रचइता,पालन कर्ता, तुम्ही संहार करइया ।
आ जावो प्रभु भागे-भागे, पार करो मेरी नइया ॥
करो कृपा अब मुझ पर, नही राम सौह है तुमको
हे जग के पालन हारी ,आराधना करे हम तुम्हारी
हे भोले त्रिपुरारी प्रभु विनती सुनो हमारी
जै भोले त्रिपुरारी....

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-२१//१९९१ रविवार रात ९.५० बजे

एन.टी.पी.सी.दादरी गाजियाबाद(.प्र.) 
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