Sunday, 27 November 2011

लोरी(निदिया)

जा रे नींदिया- जा रे नींदिया
मुन्ने को मेरे सुला जा रे नींदिया
जा रे नींदिया...........

मुन्ना है मेरे आखों का तारा
दुनिया मे चमके ये जैसे सितारा
मेरा ये प्यारा जैसे माथे की बिंदिया
जा रे नींदिया........

सुरज के जैसे ये करे नाम रोशन
सब का दुलारा बने, कोई ना दुश्मन
मुन्ने को मेरे नजर ना लगे
जा रे ......

मेरा मुन्ना बड़ा हो करके
नाम कमाएगा जी भर के
यशोदा मै इसकी,ये मेरा कन्हैया
जा रे नींदिया.....................

आज मेरा मुन्ना बहुत ही थका है
इतनी रात हो गई अभी भी जगा है
दिन भर कहे हमे मइया-मइया
जा रे नींदिया.....

मुन्ना है मेरा शेर के जैसा
डरता नही चाहे कोई कैसा
मेरा बहलता है इससे जिया
जा रे नींदिया................

लोरी मै गा के इसको सुलाऊं
दूध-भात हाथों से अपने खिलाऊं


परदेश मे है मेरे पिया
जा रे नींदिया..........

लगता है इसे नींद आने लगी
अपनी कॄपा बरसाने लगी
नींदिया है इसकी अब मइया
जा रे नींदिया, जा रे नींदिया
मुन्ने को मेरे सुला जा रे नींदिया
जारे नींदिया.........

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-//१९९१ ,बॄहस्पतिवार,रात्रि .२५ बजे,

एन.टी.पी.सी.दादरी ,गाजियाबाद (.प्र.)
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