Sunday, 27 November 2011

बरसात


बरसात का ये मौसम ,लगता है कितना प्यारा!
सब कोई कितने खुश है,दिल खुश हुआ हमारा!!
इतने दिन से ईंतजारी वर्षा की कर रहे थे!
अभी पड़ न जाए सुखा सब कोई डर रहे थे!!
सब खेत सुख रहे थे,प्यास से हो के व्याकुल!
पशु-प्क्षी-मानव-जीव-जन्तु,इसके लिए थे आकुल!!
मै भी इसी के खातिर परेशान हो रहा था!
अब तक कहा ये प्यारा बरसात सो रहा था!!
बादल के बरसने से नई बहार आई!
बुदो के साथ मे अपने हजार खुशिया लाई!!
चारो तरफ़ खुशी है,सब ओर है हरियाली!
नई जिन्दगी मिली है,खुश हो रहे है माली!!
पानी मे खेलते है बच्चो की सारी टोली!
दादुर भी बोलते है अपनी सुरिली बोली!!
नदि-नाले मिल रहे है आपस मे प्यार करके!
नदियो मे बाढ़ आई,आवाज हर-हर करके!!
परदेशी सोचते है,मै भी घर मे रहता!
वर्षा के इस समय मे पत्नी से प्यार करता!!
औरत भी सोचती है मै पी के साथ रहती!
अपने सजन के संग मे जी भर के प्यार करती!!
वर्षा रानी प्यारी,तुम जी भरके बरसो!
अमॄत बूद से तुम,जीवन को रस से भर दो!!
बरसात का ये मौसम..................

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-५/८/१९९१ ,सोमवार ,रात्रि १०.४० बजे,
एन.टी.पी.सी. दादरी ,गाजियाबाद (उ.प्र.)
Post a Comment