Sunday, 27 November 2011

प्यारा घर


मेरा नन्हा सा घर जैसे छोटा शहर
हमे कैसा ये प्यारा लगे
रहे खुशुबु से तर,मेरे दिल का जिगर
मेरी मा जैसे गंगे
मेरा नन्हा सा घर........
उसमे छोटा सा बाग,करे कैसे अनुराग
सदा फ़ुलो से खिलता रहे
मेरे बहुत से अरमान,उसे पुरे कर भगवान
सब खुशी-खुशी चलता रहे
मेरा नन्हा सा घर................
वो मन्दिर से भी प्यारा,फ़िका लगे जहा सारा,
मेरा दिल तो वही पे रहे
मै रहु चाहे दूर,हमे उस पर गुरुर
मेरे आंखो के सामने रहे
मेरा नन्हा सा घर.................
मेरा भाई मुझे प्यारा,बहना आखो की तारा,
वो हमे याद आते रहे,
सब मे आपस मे प्यार ,कभी कोई ना तकरार,
सुख-दुख सब हस के सहे
मेरा नन्हा सा घर...................
सभी कहते श्री राम,अपने काम से काम,
कभी किसी का बुरा न करे
सबका देवता पर आश,केवल उसी का विश्वाश
मन मे मा का ही ध्यान धरे
मेरा नन्हा सा घर................
मेरे घर जो भी आये,सब खुशी-खुशी जाए
कभी किसी को कष्ट न हो
मेरा प्यारा घर,ये दुलारा शहर,
तुम हर दम मुस्कराते रहो
मेरा नन्हा सा घर,जैसे छोटा शहर...........

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक- २८/७/१९९१ ,रात्रि ११.५० बजे,रविवार,
एन.टी.पी.सी.दादरी. गाजियाबाद (उ.प्र.)

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