Sunday, 27 November 2011

पत्र पत्नी का पति को

लिखने की आदत नही है मुझे,क्या लिखूं हमे कुछ आता है नही !
वो मेरे सनम मेरा दिल है ये खत,तुम इसे ही मेरा दिल मानो सही !!

मै आज तुमको पिया खत लिख रही कैसे !
मेरा दिल है मगन आज फ़ूल से जैसे !!

शुरू मे क्या तुम्हे लिखूं,समझ नही आता !
मेरे प्राण पति-प्राणनाथ-, भाग्याता !!

आपके यादों के पहलू मे, मै जीती रहती !
अपने दिल की ये कसक ,को मै सहती रहती !!

सजन गए हो यहा से, नही लगता है दिल !
तुम्हारे बिन यहा जीना, बहुत है मुश्किल !!

सावन की ये बदली,मुझे आग लग रही  है !
और कैसे क्या लिखूं,मुझे लाज लग रही है !!

मेरे आंसू बह रहे है पिया, खत को लिखते-लिखते !
मै जी नही हुं सकती, पिया तेरे बगैर रह के !!

जब से पिया गये हो, खत भी नही लिखे !
जब-जब तुम्हारी याद की,तब तब मुझे दिखे !!

मेरे भोले -भाले साजन ,तेरी बात याद आये !
मेरा भाग्य कितना है अच्छा,जो पिया तुम्हे हम पाये !!

नहि भुख-प्यास लगती,नही नीद आती हमको !
दिन रात रो-रो करके, मै याद करती तुमको !!

मै ईंतजारी करती,तुम शिघ्रता से आवो !
वो मेरे प्यारे दिलवर,मेरे बहार आवो !!

तुम अपना ख्याल रखना, पिया दुर देश रह के !
मेरा सिन्दूर रहे सलामत,हजार धूप सह के !!

खत मे थोड़ी जगह है, लिखने की और चाहत !
स्याही भी खत्म होने को, देती है जैसे आहट !!

आखिर मे दुआ है मेरी,तुम खुश होके रहना !
मेरे दिल के पत्र का तुम, जल्दी जवाब देना !!

तेरी दिल बहार-दिल कश खुशुबू,-तेरी यादों मे रहने वाली !
तेरी प्राण प्रिया अर्धांगिनी है,इस पुरे खत को लिखने वाली !!
मै आज तुमको पिया खत को लिख रही....

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com

दिनांक-२१//१९९१,रविवार,दोपहर ,.०५ बजे,




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