Sunday, 27 November 2011

जीवन के सफ़र मे हम


जीवन के सफ़र मे हम,चलते ही रहते हैं !
यदि बात कहे कोई,सहते ही रहते हैं !!

जो कोई जहां पे है,खुश है वो वहां पे नही !
ऐसा ही हाल मेरा, मै जाऊं जहां भी कहीं !!

मेरी किस्मत ही ऐसी, कोई हुआ मेरा !
अपनो ने दिया धोखा,मै डालूं कहां डेरा !!

मंजील मुझको अपनी, बहुत दूर झलकती है !
उसकी राहों मे बहुत, बारुद मिल रहे हैं !!

मेरा मन नही है टिकता, कहीं एक जगह जाकर !
खुश हूं बहुत तरह से, ये बदनसिबी पाकर !!

रोना नही है आता, जी भर के कैसे रोऊं !
आंसू नही निकलते, सेजों पे कैसे सोऊं !!

ये जींदगी हमारी ,बर्बाद हो रही है !
जैसा किया है मैने, वैसे ही मिल रही है !!

मुझे आज अपने दिल मे, बड़ी ठेस लग रही है !
अपनी ही जींदगी मुझे ,कैसी ये ठग रही है !!

अन्जाना मै हूं यहा पर,अन्जानी मेरी दुनिया !
यदि कोई जानता हो, समझा दो मुझको राहें !!

इन आखों मे है अंधेरा,रोशनी नही है इनमे!
आगों के कुण्ड यहा पे,डालूं मै हाथ किसमे!!

मेरी उम्र ढल रही है, ऐसे ही सोच करके!
बर्बाद हो रहा हूं, ये कल्पनाएं करके!!

औरों का मेरे उपर ,कर्जा चढ़ा हुआ है!
उसको उतारुं कैसे, सर पर खड़ा हुआ है!!

पैदा हुआ मै क्युं ,मर गया मै होता!
आगों से बच गया क्युं,जल गया मै होता!!

मेरा नही सहारा, दुनिया मे दिख रहा है!
रोशनी के बदले मुझे, अन्धकार मिल रहा है!!
जीवन के सफ़र मे हम...............

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-१२//१९९१ ,सोमवार,शाम .१० बजे,

एन.टी.पी.सी.दादरी ,गाजियाबाद(.प्र.)


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