Monday, 19 February 2024

मेरा ये अपना जीवन

मेरा ये अपना जीवन ,मुझे कैसा लग रहा है !
सारा जमाना हमको लगता है ठग रहा है !!

ये कैसा नसीब मेरा जिसे चाहता मिलता !
मैने पाया फ़ूल ऐसा ,जो कभी नही है खिलता !!

मेरे सिधे पन का मतलब,लोगों ने गलत समझा !
आदर के बदले मुझको,निरादर मिला है सब से !!

मेरा दिल है जलता रहता,किससे करुं मै बातें !
मै रात-रात जग के,बिताते रहे है रातें !!

हम आज अपनी किस्मत से, परेशान हो रहे हैं !
दुनिया के ढंग से हम, हैरान हो रहे हैं !!

मेरा अपना प्यारा जीवन, बर्बाद हो रहा है !
मुझे हर तरफ़ अंधेरा ,अन्धेरा ही मिल रहा है !!

मै जिस जगह पे जाऊं,मेरा कोई नही है सुनता !
मै जिस किसी को चाहूं,मुझे वो नही है मिलता !!

गरीबों से हमको अपना,भरपूर प्यार मिलता !
ईंसानियत का हमको ,उनसे ही ग्यान मिलता !!

मै हो गया हुं नर्वश,मुझे रास्ता मिलता !
कोई मुझे बता दो मेरी, मंजील है कहां पर !!
मेरा ये अपना जीवन...................

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनां-२७//१९९१ ,शुक्रवार ,शाम -.५० बजे,

एन.टी.पी.सी.दादरी ,गाजियाबाद (.प्र.)

No comments: